महापौर ने कलेक्टर के संज्ञान में लाया मामले को, सूची निरस्त करने का किया आग्रह
अंबिकापुर। केन्द्र सरकार की आवासहीन गरीब परिवारों को पक्का घर देने की योजनांतर्गत निगम क्षेत्र के सुभाषनगर में बने आवासीय कॉलोनी के आधे से ज्यादा मकान एक ही वार्ड के आवेदकों को आबंटित करने सूची तैयार कर ली गई। लॉटरी के माध्यम से मकान को आबंटित करने की तिथि सामने आने के बाद जब सत्ता पक्ष के पार्षदों ने इस सूची को देखा तो विरोध का स्वर मुखर करते वे सामने आ गए। महापौर मंजूषा भगत के संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होंने कलेक्टर से मोबाइल फोन पर चर्चा करके इसकी जानकारी दी है और आवास आबंटन के लिए बनाई गई सूची को निरस्त करते हुए सभी हितग्राहियों को लॉटरी प्रक्रिया में शामिल करने का आग्रह किया है।
बता दें कि मोर मकान मोर चिन्हारी योजना अंतर्गत सुभाषनगर में 493 मकानों का आबंटन होना है, इनमें में 465 मकान पूर्ण हो गए हैं। इन मकानों को लॉटरी के माध्यम से आबंटित करने के लिए 4 अप्रैल तिथि तय करने के बाद शहर के राजमोहिनी देवी भवन में सूचीबद्ध किए गए लोगों को आमंत्रित किया गया था। निगम की पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल दौरान हजारों आवासहीन लोगों ने आवेदन किया था। इस दौरान आवेदकों से कुछ राशि भी ली गई थी, यह मुद्दा सामान्य सभा में उठा था और आवेदकों को राशि वापस करने की बात हुई थी। इसके बाद बिना किसी शुल्क के आवेदन मंगाए गए थे, जिस पर करीब 9 हजार आवेदन मिले। अधिकारियों ने पड़ताल करने के बाद 1924 लोगों को पात्र माना। इन पात्र लोगों के बीच बने मकानों का आबंटन लॉटरी के माध्यम से होना था। सामने यह भी आया कि जिन 465 लोगों को मकान का आबंटन किया जाना था, उसकी सूची अलग से तैयार की गई थी। इसके बाद सिर्फ मकान नंबर का आबंटन आवास के पात्र हितग्राहियों को किया जाना था। यह बात शहर के लोगों को नहीं पच रहा है। लाटरी में सभी 1924 लोगों को शामिल क्यों नहीं किया जा रहा है, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे थे। वहीं 465 आवासों में 251 आवास वार्ड क्रमांक 47 गंगापुर वार्ड के आवेदकों के लिए दे दिए गए। गंगापुर वार्ड के लोगों के लिए सर्वाधिक मकानों के आबंटन के पीछे की दलील है, कि इलाके को कब्जामुक्त कराना है, जो किसी भी दूष्टि से तर्कसंगत नहीं है। शेष 214 मकानों को निगम के 48 वार्डों में से शेष 47 वार्डों में मनमाफिक तरीके से बांट दिया गया। इसमें किसी वार्ड के 1-2 और किसी वार्ड को अधिक संख्या में मकान देने सूचिबद्ध किया गया है। मामले में निगम के पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि इस योजना की मानिटरिंग करने वाले सीएसडीसी विभाग के अधिकारियों द्वारा सर्वे करके सूची तैयार किया गया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब खुद निगम 1924 लोगों को इस योजना के लिए पात्र माना है तो बिना लॉटरी निकाले आवास व्यक्ति विशेष, हितग्राही के नाम पर कैसे कर दिया गया।
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मनमाफिक तैयार की गई सूची
फोटो-हरमिन्दर सिंह टिन्नी, मनोज कंसारी
निगम के सभापति हरमिन्दर सिंह टिन्नी ने कहा कि सूची मनमाफिक तरीके से तैयार की गई है। स्वयं उनके पूर्व व वर्तमान वार्ड से एक-दो लोगों का नाम सूची में शामिल है। इसे कलेक्टर के संज्ञान में महापौर के द्वारा लाया गया है। सूची को बनाने में शामिल लोगों के विरूद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। वार्ड क्रमांक 17 के पूर्व पार्षद व भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज कंसारी ने इस सूची को भ्रष्टाचार से युक्त और पूर्ववर्ती निगम की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तैयार सूची बताया और कहा कि इसे जारी करके भाजपा सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया है।
बयान बाक्स में
फोटो-मंजूषा भगत
मैंने कलेक्टर के संज्ञान में इस मामले को लाया है और लॉटरी के माध्यम से आवास आबंटन के लिए बनाई गई सूची के प्रति असंतोष जाहिर करते हुए इसे निरस्त करने का आग्रह किया है। वर्तमान में कलेक्टर शहर से बाहर हैं, इस कारण उनसे प्रत्यक्ष मुलाकात नहीं हो पाई है। अगर गलत तरीके से आवास का आबंटन किया जाता है, तो अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए एमआईसी में इसे निरस्त करने पहल करेंगी।
मंजूषा भगत, महापौर नपानि अंबिकापुर

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